उत्तरप्रदेश

ट्विटर का पत्रकार व सबसे छोटे स्तर का आदमी सबसे बड़ा पत्रकार

समय मिलते ही पूरा विश्लेषण करुंगा ~ संजय भाटी

सुप्रीम न्यूज परिवार की ओर से दीपावली की शुभकामनाओं सहित आपसे आग्रह

सबसे पहले हम सभी ट्विटर वासियों व देशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए आप सभी से आग्रह कर रहे हैं कि आप सभी देशवासियों को ट्विटर पर अपनी आवाज बुलंद करने की सलाह दें। जो लोग बहुत ज्यादा गरीब या फिर दूसरे किसी कारण से अपनी आवाज उठाने में सक्षम नही हैं। आज के दौर में भी फोन आदि नही चला रहे हैं उनकी मदद की जिम्मेदारी आप सभी लेते हुए उनकी वास्तविक स्थिति और समस्याओं को ट्विटर पर शेयर करें 

कौन पत्रकार है कौन पत्रकार नही है कौन असली पत्रकार है कौन नकली पत्रकार है यह बहस मैं अपने होश संभालने के साथ से ही बड़े-बड़े टीवी चैनलों की की स्क्रीन और अखबारों के पन्नों पर भी देखता चला रहा हूं। इस बहस को सुनते सुनते मैं हारे और बुरी तरह घबराए हुए उन पत्रकारों को देखता हूं। जो अपने चेहरे की खिसियाहट के साथ टीवी चैनलों पर बैठकर अपने आप को बड़ा पत्रकार साबित करने की डिबेट करते हैं। मैं हमेशा उनके शब्दों से ज्यादा उनके चेहरे की भाव भंगिमा और उनकी बोखलाहट पर ही नजर जमाए रहता हूं।

यदि आप भी अपने कानों और आंखों से भरपूर काम लेते हुए अपने दिमाग को सक्रिय रखते हैं तो यह दृश्य साफ दिखाई देता है कि दुनिया के सबसे छोटे स्तर के आदमी की पत्रकारिता ने उनकी चौधराहट को चुनौती दी हुई है जिससे उनके डगमगाते हुए सिंहासनों से बढ़ती हुई इनकी चिंता उनके शो के दौरान उनके चेहरों से साफ-साफ दिखाई देती है।

मोटा-मोटी बात यह है कि जो जितना बड़ा आदमी है उसके खर्चे उसके विलासितापूर्ण जीवन शैली के चलते बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं। जिनकी लगातार पूर्ति करने के लिए किसी भी व्यक्ति को भ्रष्टाचारियों से सांठगांठ करके रखने को मजबूर होना पड़ता हैं।

अब आप एक खास बात समझ लीजिए जिस पर भारत के हर ईमानदार नागरिक को काम करना चाहिए। हम आपको बता दें कि देश में सारे खेल मीडिया मैनेजमेंट से चल रहे हैं हम सबको मिलकर इस मीडिया मैनेजमेंट को तोड़ना है। आज के दौर में कोई भी व्यक्ति हथियारों के बल पर कोई बदलाव नही कर सकता। अब बस इतना समझ लिजिए कि आपको किसी भी हाल में मीडिया मैनेजमेंट का हिस्सा नही बनना है। भले ही आपको जेल जाना पड़े। दूसरे आपको जनता के साथ मिलकर दलाली कर रहे पेशेवर पत्रकारों और उनके आकाओं तक को बेनकाब करना है। आपके मुद्दे छोटे हों या फिर बड़े हों। 

पत्रकारिता के नाम पर अधिकांश पत्रकारों द्वारा खुद अवैध वसूली की जाती है जिसके चलते वे कभी भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के भ्रष्टाचार, तानाशाही और गैर-कानूनी गतिविधियों का विरोध नही करते। अधिकांश पत्रकारों द्वारा पत्रकारों के हितों के नाम पर संगठन बना कर एकजुट होकर उगाही के धंधों के टेंडर जारी किए जाते हैं।

क्लबिया पत्रकारिता के नमूनों पर कभी भी मुकदमें दर्ज नही होते आप स्वयं देख सकते हो  ये लोग पलक झपकते ही किसी आम आदमी और पोल खोलने वालों  पर 100% फर्जी मुकदमें दर्ज कराने में सक्षम होते हैं। 

 

 

 वर्तमान समय में पेशेवर पत्रकारिता समाज सेवा नही रही है बल्कि यह दलाली और अवैध वसूली का धंधा मात्र है। बड़े मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को भी उगाही और दलाली के धंधे के लिए पत्रकार संगठनों की सदस्यता की जरूरत हो रही है। इसके पीछे बताया तो यह जाता है कि सच्चाई को सामने लाने के लिए संगठन की जरूरत होती है। जबकि यह एक सफेद झूठ है। वास्तविकता इसके विपरित है। संगठन तो मनमाफिक एजेंडे चलाने के लिए बनाए जाते हैं।सच्चाई को दबाकर भ्रष्टाचार और अपराध में लिप्त लोगों को लाभ देकर अवैध लाभ में हिस्सा लेने के लिए पत्रकार संगठनों की आवश्यकता होती है।

हम यहां अधिकांश पत्रकार संगठनों की बात कर रहे हैं कोई एक दो ईमानदारी से भी काम कर रहे हो सकते हैं। हमारा मकसद ईमानदार पत्रकारों के सम्मान को ठेस पहुंचाना बिल्कुल भी नही है। लेकिन पत्रकारिता में ईमानदारी एक अपवाद है। जिसका परिक्षण ट्विटर पर मौजूद जन समस्याओं पर पत्रकारों के द्वारा दिनभर में उठाए जा रहे मुद्दों और उन पर किए जा रहे उनके कॉमेंट्स से भलीभांति लग जाता है।

बहुत से पत्रकारों पर जब उनकी कारगुज़ारियों के चलते FIR दर्ज होती है तो वे पत्रकार फर्जी मुकदमा दर्ज होने का राग अलापने लगते हैं। यदि उनसे पूछा जाए कि क्या यह मुकदमा पत्रकारिता करने के कारण दर्ज हुआ? कौन सी खबर या खबरों को लेकर मुकदमा दर्ज हुआ है? तो बोलती बंद।

पत्रकारों पर पत्रकारिता के चलते भी बहुत से मुकदमें दर्ज होते हैं। लेकिन ये मुकदमें अपने आप ही पत्रकारों का पक्ष रखते हैं। यहां तो पत्रकार घरवालों से या गली मौहल्लों वालों से दंगा फसाद कर पत्रकार एकता की मांग कर देते हैं।‌‌‌‌‌ कुछ पत्रकार तो अपने पति या पत्नी से हुए विवादों में पत्रकारिता को संकट में बता कर पत्रकार एकता जिंदाबाद का नारा बुलंद करने लगते हैं। अकेले गौतमबुद्धनगर के ऐसे कई मामलों में हम ने पत्रकार संगठनों को अधिकारियों पर दबाब बनाते हुए देखा है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो पत्रकार एकता जिंदाबाद के ऐसे हजारों मामले हमारी नजर में ट्विटर पर ही मौजूद हैं।

आगे जारी रखते हुए समय मिलते ही पूरा विश्लेषण करेंगे ~ संपादक

 

 

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