अधिवक्ता-पत्रकार और पुलिस-प्रशासन

भैरोपाल DDC, गौतमबुद्धनगर व अन्य के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने का आदेश

वरिष्ठ अधिवक्ता देवराज नागर का भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष एक मिशाल

वरिष्ठ अधिवक्ता देवराज नागर का भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष एक मिशाल

सुप्रीम न्यूज नेटवर्क

गौतमबुद्धनगर। अपर जिलाधिकारी न्यायिक गौतमबुद्धनगर भैरोपाल जिन पर DDC (उपसंचालक चकबंदी का अतिरिक्त चार्ज) व दिवाकर सिंह तत्काली उपसंचालक अधिकारी चकबन्दी, शीशपाल पेशगार तत्काली उपसंचालक अधिकारी चकबन्दी, के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश मेरठ स्थित “न्यायालय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, विशेष न्यायालय सं० 02, (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में दाण्डिक प्रकीर्ण सं० 129 /2025 देवराज नागर बनाम भैरोपाल आदि में दिनांक 17.09.2025 को दिया है।

 

न्यायालय द्वारा अपने आदेश में वर्णित किया गया है कि आवेदक द्वारा वादपत्र के अनुसार यह आपराधिक कृत्य भैरोपाल उपसंचालक अधिकारी चकबन्दी, दिवाकर सिंह तत्काली उपसंचालक अधिकारी चकबन्दी, शीशपाल पेशगार तत्काली उपसंचालक अधिकारी चकबन्दी, जो लोक सेवक की श्रेणी में आते हैं, को आरोपितकिया गया है। इस प्रकार मामला प्रर्थम दृष्टया भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अपराध से संबंधितहै।

 

उपसंचालक चकबंदी अधिकारी भैरोपाल आदि के विरुद्ध FIR दर्ज करने का यह आदेश संबंधित थाना प्रभारी सूरजपुर ग्रेटर नोएडा गौतमबुद्धनगर के लिए है। न्यायालय द्वारा अपने आदेश में कहा गया है कि अभियोग पंजीकण की सूचना न्यायालय को 15 दिवस के अन्दर उपलब्ध करायी जाये।

 

न्यायालय के आदेश में यह तथ्य भी स्पष्ट वर्णनित है कि प्रार्थी ने जिसकी शिकायत जिलाधिकारी महोदय गौतमबुद्धनगर के कार्यालय में दिनांक 20.12.2024 को रिसीव करायी गयी थी। दिनांक 20.12.2024 में ही पुलिस आयुक्त महोदय गौतमबुद्धनगर एवं दिनांक 20.12.2024 में ही चकबन्दी आयुक्त इन्दिरा भवन, लखनऊ, उ०प्र० एवं मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ एवं थाना सूरजपुर को रजिस्टर्ड डाक द्वारा उक्त घटना के सम्बन्ध में शिकायत प्रार्थना पत्र प्रेषितकिये गये। परन्तु आज तक उक्त प्रार्थना पत्रों पर कोई कानूनी कार्यवाही अमल में नहीं लायी गयी।

 

अब यहां हम आपको यह बताना चाहते हैं कि आम आदमी आये दिन किसी न किसी सरकारी विभाग में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा भ्रष्टाचार का शिकार बनाया जाता है। जिसकी शिकायतें भी आमतौर पर जनता जनार्दन द्वारा की जाती हैं। लेकिन सरकारी मशीनरी में मौजूद उच्च अधिकारियों का रैवया भी अपने विभाग के अधिकारियों की कारगुजारियों को संरक्षण देने का ही रहता है।

इस मामले में वादी देवराज नागर स्वयं एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। जिन्होंने लंबे समय तक मजबूती के साथ कानून पर भरोसा किया है। क्या एक आम आदमी के लिए इतना कर पाना संभव है? यदि एक आम व्यक्ति सरकारी मशीनरी के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के बारे में सोचता भी है तो सरकारी मशीनरी उसे झूठे मुकदमों में फसा कर जेल की हवा खिलाने में देर नहीं लगाती। एडवोकेट देवराज नागर ने बताया कि वे मामले की प्रत्येक सुनवाई पर मेरठ जाते थे।

 

इस मामले में अपर जिलाधिकारी न्यायिक गौतमबुद्धनगर भैरोपाल के मोबाइल नंबर पर उनका पक्ष जानने के लिए फोन कॉल की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद जिला अधिकारी महोदय के फोन पर फोन कॉल की गई तो उनके पीआरओ ने बताया कि डीएम साहब अभी मीटिंग में हैं।

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